Dindori District MP | डिन्डोरी जिला म.प्र.

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Wednesday, January 22, 2020

डिंडोरी जिले के दर्शनीय और पर्यटन | Dindori tourist place | Dindori Tourism hindi -

 January 22, 2020     जिले के पर्यटन स्थल   

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Dindori Tourist Places

डिण्डोरी जिले के दर्शनीय और पर्यटन | Dindori Tourism hindi-

डिण्डोरी जिला मध्यप्रदेश राज्य का हिस्सा है , जिले की स्थापना  1998 में मण्डला जिले को विभाजित कर की गई थी,| डिंडोरी जिला जबलपुर सम्भाग के अंतर्गत आता है | डिंडोरी जिले में तीन तहसील - डिंडोरी, शहपुरा और बजाग है | इसमे सात विकासखंड –डिण्डोरी ,शाहपुरा ,मेहंदवानी,अमरपुर ,बजाग , करंजिया और समनापुर हैं| जीवन दायनी पवित्र माँ नर्मदा नदी  भी डिण्डोरी के बीच से बहती हैं |डिंडोरी जिले में घुमने योग्य कई पर्यटन स्थल हैं |
2011 की जनगणना के अनुसार  जिले की कुल  जनसंख्या 704,524 है | डिंडोरी जिले का  जनसंख्या घनत्व 94 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है |  जिले की कुल साक्षरता  दर  63.9%  रही | डिंडोरी जिले की  कुल जनसँख्या का 64% अनुसूचित जनजाति के  लोग हैं | यहाँ की मुख्य जनजाति बैगा और गोंड है  | बैगा जनजाति को राष्ट्रीय मानव का दर्जा प्राप्त है | पवित्र नर्मदा नदी और बुढनेर नदी डिंडोरी जिले की प्रमुख नदिया हैं |
डिंडोरी जिले में घूमने हेतु कई ऐतिहासिक , धार्मिक और प्राकृतिक  पर्यटन स्थल हैं | इनमे प्रमुख दर्शनीय और पर्यटन स्थल निम्न  है -

(1)   घुघवा राष्ट्रीय जीवाश्म उद्यान - 


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घुघवा  राष्ट्रीय जीवाश्म उद्यान  डिण्डोरी  जिले में स्थिल महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल  है |घुघवा  राष्ट्रीय जीवाश्म उद्यान   डिंडोरी से से 70 किलोमीटर दूर स्थित है | घुघुआ/घुघवा में  6.5  करोड़ वर्ष पुराने पेड़-पौधों के जीवाश्म पाए गए हैं  |  राष्ट्रीय जीवाश्म उद्यान  घुघवा मध्यप्रदेश का सबसे छोटा राष्ट्रीय उद्यान  है  जो  0.27 वर्ग किलेमीटर में फैला हुआ है  | घुघवा उद्यान में  पौधों  के तनो, फल, फूल, बीज के अतिरिक्त डायनोसौर के अंडे और कुछ समुद्री जीवों के जीवाश्म भी मिले हैं |इन जीवाश्मों ने यूकेलिप्टस , नारियल और ताड़ के जीवाश्म प्रमुख हैं | घुघुआ में  जीवाश्मो की खोज 1970 में  डॉक्टर धर्मेन्द्र प्रसाद ने की थी |  घुघवा को 05 मई 1983  में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया | घुघवा में अभी  18 फैमिली  और तक 31 जेनेरा के जीवाश्म खोजे जा चुके हैं |

 (2)- रामगढ़ डिंडोरी  - 

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Ramgarh
 रामगढ डिंडोरी जिले का बहुत ही महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दर्शनीय स्थल है |  डिंडोरी से 23 किलोमीटर दूर अमरपुर विकास खंड के पास   रानी अवन्ती बाई की कर्मभूमि और  राजधानी रामगढ़ है | यहाँ अब रानी अवन्ती बाई के महल की दीवारों के  कुछ अवशेष ही शेष  बचे हुए हैं  | अब रामगढ में  इस महल के पास वाली जगह पर 1988-1989 में  रानी अवन्ती बाई की मूर्ति स्थापित कर एक बड़ा पार्क बना दिया गया है | अंग्रेज रानी अवन्ती बाई से उनका राज्य हड़पना चाहते  थे |  1857 की क्रांति में रानी अवन्ती बाई ने अंग्रेजों से युद्ध कर वीरगति को प्राप्त हुईं |  रामगढ में ही रानी अवन्ती बाई की समाधी भी है | रामगढ़  डिंडोरी जिले के अमरपुर ब्लाक के अंतर्गत आता है | पहले रामगढ मंडला जिले का हिस्सा था और आज का   डिंडोरी भी रामगढ  रियासत का हिस्सा था |



(3)   रानी अवंतिबाई का बलिदान स्थल ग्राम-बालपुर  –

ग्राम-बालपुर डिन्डोरी जिले का मतवपूर्ण दर्शनीय स्थल है | डिण्डोरी से लगभग 17 किलोमीटर दूर शाहपुर कस्बे के नजदीक ग्राम बालपुर में रानी अवंतिबाई का बलिदान स्थल है | रानी अवंतिबाई अंगेजों के विरुद्ध युद्ध करते हुए  20 मार्च 1958 को इसी स्थान पर अपने सीने में  खंजर मारा और मात्रभूमि की रक्षा हेतु  वीरगति को प्राप्त  हुईं |प्रतिवर्ष 20 मार्च को बालपुर में  रानी अवन्ती को याद किया  जाता है | बालपुर के इस स्थान  पर रानी अवन्ती की प्रतिमा लगाई  गई है |

रानी दुर्गावती से संबंधित पुस्तक (Books ) ऑनलाइन उपलब्ध है जिसकी लिंक नीचे दी गई है -
रामगढ़ की रानी अवंतिबाई   (लेखक- राजीव ठाकुर)

(4)  कारोपानी  श्याम मृग संरक्षित क्षेत्र- 


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Kropani Park Dindori
कारोपानी श्याम मृग संरक्षित क्षेत्र भी डिंडोरी जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों में  से एक है  | डिंडोरी जिले में काले हिरणों के लिए संरक्षित क्षेत्र करोपनी गाँव में स्थित है जो एक वनग्राम है | करोपनी में काले हिरनों अर्थात श्याम मृग और धब्बेदार हिरन बड़ी संख्या में पाए जाते हैं | इन काले हिरनों को  शासन द्वारा संरक्षण दिया गया है और फारेस्ट विभाग इसकी देखभाल करता है |करोपनी में ग्रामीण भी  इन हिरनों को संरक्षण देते हैं और ग्रामीण और फोरेस्ट विभाग के कारण हिरन बड़ी तादात में बचे हुए  हैं | यहाँ बड़ी संख्या में सैलानी भी आते हैं| करोपनी डिंडोरी -अमरकंटक  मार्ग पर डिंडोरी से 17 किलोमीटर की दूर  है |


डिंडोरी के कुछ प्रमुख होटल्स की बुकिंग नीचे दी गई वेबसाइट पर उपलब्ध है -
www.makemytrip.com
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(5)   लक्ष्मण मडवा रामघाट डिंडोरी –

 

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Laxman Madva Dindori
 डिण्डोरी से सात किलोमीटर दूर माँ नर्मदा नदी के किनारे लक्ष्मण मडवा रामघाट  स्थित है  | यह स्थान ग्राम -घानाघाट  के नजदीक है | यहाँ बहुत से सुन्दर छोटे छोटे झरने  है   पास ही में  मंदिर और सुन्दर घांट हैं|माँ नर्मदा के एक तरफ लक्ष्मण मडवा और दूसरी तरफ रामघाट है | जनश्रुति के अनुसार अपने वनवास के दौरान भगवान् राम , माता सीता और लक्ष्मणजी कुछ समय के लिये   इस स्थान पर रुके थे | यहाँ मकर संक्रांति को मेला लगता है  और समय समय पर धार्मिक अनुष्ठान भी होते रहते हैं | यह डिन्डोरी जिले का प्रमुख दर्शनीय ल और पिकनिक स्पॉट है | 

(6)   कुकर्रामठ (ऋण मुक्तेश्वर ) मंदिर – 


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Kukarramath Dindori
कुकर्रामठ डिंडोरी जिले का महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है | डिण्डोरी से 15 किलोमीटर दूर  कल्चुरी कालीन  भगवान शिव का मंदिर है | कुकर्रामठ मंदिर का  निर्माण 1000 ईसवी के पूर्व माना जाता है |कहा जाता है की इस मंदिर में पूजा पाठ करने से देव ऋण,पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है इसी कारण इस मंदिर को  ऋणमुक्तेश्वर मंदिर  के नाम से भी जाना जाता है |मंदिर के निर्माण से सम्बंधित कई मत प्रचलित हैं पहले मत के अनुसार तात्कालीन शंकराचार्य ने गुरुऋण से मुक्त होने के लिये कल्चुरी नरेश कोकल्यदेव के सहयोग से इस मंदिर का निर्माण करवाया था | एक अन्य मत के अनुसार इस इस्थान पर एक कुत्ते ने अपने मालिक को ऋण से मुक्त करवाया और अपने प्राण त्याग दिये | कुत्ते के मालिक ने कुत्ते  याद में यहाँ  कुत्ते की  समाधी और मूर्ति का निर्माण करवाया | चूँकि कुत्ते को कुकर भी कहा जाता है इसीलिये इस मंदिर को कुकर्रामठ भी कहा जाता है | माना  जाता है की इस स्थान पर 6 मंदिरों का समूह था परन्तु अब सिर्फ  एक मंदिर ही बचा है | कुकर्रामठ मंदिर की देखभाल अब पुरातत्व विभाग कर रहा है |


(7) किकरकुंड मेहंद्वानी डिंडोरी - 

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Kikarkund Dindori
किकरकुंड  डिंडोरी जिले के मेहंद्वानी ब्लाक में स्थित महत्त्वपूर्ण पिकनिक स्पॉट और  बहुत ही सुन्दर स्थान है | इस स्थान पर दनदना नदी बहुत ही आकर्षक और मनमोहक जलप्रपात बनाती है | दनदना नदी का पानी जिस स्थान पर गिरता है वहां एक बहुत ही बड़ा कुंड बन गया है | कुंड के पास ही कई पप्राचीन मंदिर और मूर्तियाँ हैं | किकरकुंड तक पहुँचने के लिये कच्छा पक्का रास्ता है | किकर कुंड की डिंडोरी से दूरी लगभग 75 किलोमीटर है |

(8)    कपिलधारा जलप्रपात- 


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Kapil dhara
 कपिलधारा जलप्रपात डिंडोरी और अमरकंटक की सीमा पर स्थित है | कपिलधारा का एक छोर अमरकंटक की सीमा में आता है और दूसरा छोर डिंडोरी जिले की सीमा के अंतर्गत आता है | कपिलधार जलप्रपात माँ नर्मदा का पहला जल जलप्रपात है | कपिल धारा जलप्रपात की ऊंचाई लगभग 100 फीट है | कपिलधारा जलप्रपात के पास ही कपिल मुनि का आश्रम है | जनश्रुति के अनुसार इस स्थान पर कपिल मुनि ने तपस्या  की थी और उन्ही के नाम पर इस स्थान का नाम कपिलधारा पड़ा |

(9) देवनाला वाटरफाल डिन्डोरी- 


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Devnala Dindori
देवनाला जलप्रपात डिण्डोरी से २२ किलोमीटर दूर मंडला रोड पर स्थित सुन्दर जलप्रपात है | देवनाला ग्राम सक्का के पास ग्राम कचनारी में स्थित है |  देवनाला में झरने का पानी झरने के नीचे बने शिव लिंग पर गिरता रहता  है |इस स्थान पर पहाड़ी v आकार की दिखलाई देती है | झरने के पास कुछ छोटे-छोटे झरने भी हैं | यह डिन्डोरी जिले का प्रमुख दर्शनीय स्थल और पिकनिक स्पॉट है |

(10)  दगोना वाटरफाल डिन्डोरी– 


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DAGONA FALL DINDORI
दगोना वॉटरफॉल डिण्डोरी से लगभग 65 किलोमीटर दूर ग्राम गोरा और ग्राम कन्हारी के पास स्थित है | यह  स्थान बुढनेर नदी पर स्थित है |दगोना में मिट्टी के कटाव के कारण एक नाली नुमा संरचना बन गई है और बुढनेर नदी इस नाली रूपी संरचना से बहती है | इस स्थान पर नदी को एक डग अर्थात कदम में पार कर सकते है इसीलिये इस स्थान  को दगोना कहा जाता है | इस स्थान पर  कई   छोटे-छोटे सुन्दर जलप्रपात भी है |यह स्थान साल के जंगलों से घिरा हुआ है |

(11) नेवसा वाटरफाल डिन्डोरी–


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Nevsa fall Dindori
नेवसा फॉल डिण्डोरी से १४ किलोमीटर दूर स्थित नेवसा नामक ग्राम में   स्थित है | नेवसा में तीन सुन्दर झरने हैं  | इन  झरनों में दूसरा झरना बहुत ही बड़ा और सुन्दर  है | दूसरे झरने के नीचे बनी गुफा मैं एक मंदिर  भी है मंदिर के अन्दर शिवलिंग और नंदी की प्रतिमा स्थापित है  | इन तीनो झरनों में गुफाएं बन गई हैं | बरसात में इस स्थान का सोंदर्य देखने लायक होता है | बरसात में में इन तीन झरनों  सांथ-सांथ कई और झरने भी बन जाते हैं | डिन्डोरी जिले के लोगों के लिये यह एक महत्वपूर्ण पिकनिक स्पॉट और पर्यटन स्थल है | 

(12)-डिंडोरी के नर्मदा घाट -


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Ma Narmda Ghat Dindori
डिंडोरी शहर के बीचो बीच से पवित्र नर्मदा नदी बहती है | डिंडोरी पहल शहर है जिसमें माँ नर्मदा अपने उद्गम के बाद बाद प्रवेश करती हैं | डिंडोरी में  माँ नर्मदा के तट पर कई घाट हैं जिनमे प्रमुख है - डेम घाट , शंकर घाट, इमली कुटी घाट और जोगी टिकरिया घाट | 

(12) हल्दी करेली - डिंडोरी- 


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Hladi Kareli Dindori

हल्दी करेली को डिंडोरी जिले का मिनी गोवा कहा जाता है | हल्दी करेली डिंडोरी जिले के समनापुर विकास खंड के अंतर्गत आता है |हल्दी करेली में बुडनेर नदी पर सुन्दर झरने बनाती है | झरने से गिरने के बाद नीचे रेट का बहुत ही बड़ा मैदान है | इस स्थान की चट्टानें पीली और सिल्वर दिखलाई देती है , जब इन चट्टानों पर सूरज की किरने पड़ती हैं तब यहाँ का नजारा देखने लायक होता है | यह स्थान घने जंगलों से घिरा हुआ है | दूर दूर से लोग पिकनिक मनाने के लिए यहाँ आते हैं |

 डिन्डोरी कैसे पहुचें | How To Reach Dindori –

वायु मार्ग – निकटतम एयरपोर्ट जबलपुर 144 कि.मी. है |
रेल द्वारा – निकटतम रेल्वे स्टेशन बीरसिंहपुर पाली -80 किलोमीटर और   जबलपुर 144 किलोमीटर दूर है |
सड़क मार्ग - डिण्डोरी से जबलपुर 144 कि.मी.  , अमरकंटक से दूरी 88 किमी. , मंडला 104 किमी.  , बिलासपुर (छत्तीसगढ़ ) 190 किलोमीटर है | डिण्डोरी जिला मुख्यालय  से कान्हा राष्ट्रीय उद्यान 140 किमी. तथा बांधवगढ़ भी 140 किलोमीटर दूर है |

डिंडोरी के प्रमुख होटल | Hotels in Dindori -

डिंडोरी के छोटा शहर है  यहाँ आपके रुकने के लिए कुछ अच्छे और औसद दर्जे के होटल मिल जियेंगें जिनमे आप अपने बजट के अनुसार रुक सकते हैं | डिंडोरी शहर के कुछ प्रमुख होटल इस प्रकार हैं -

(1) होटल नर्मदा इन 
(2) होटल नीलम लॉज एंड रेस्टारेंट 
(3) होटल विजय ग्रांड
(4) मनीषा लॉज
(5) होटल आशा रेजीडेंसी
(6) होटल अनुराग रेजीडेंसी
(7) होटल शिवराज पैलेस
(8) गुप्ता हाउस 
(9) होटल श्री माया
(10) मिडवे ट्रीट जोगीटिकरिया, डिंडोरी

इन होटल्स के आलावा भी डिंडोरी में बहुत से बड़े -छोटे होटल्स हैं और कुछ निर्माणाधीन हैं |

डिंडोरी के कुछ प्रमुख होटल्स की बुकिंग नीचे दी गई वेबसाइट पर उपलब्ध है -
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डिंडोरी जिले के नजदीकी पर्यटन स्थल | Tourist Places Near Dindori-

डिन्डोरी जिले के नजदीकी पर्यटन स्थल निम्नानुसार है | List Of Tourist Place near Dindori -
(1) मंडला जिले के पर्यटन स्थल
(2) शहडोल जिले के पर्यटन स्थल 
(3) अमरकंटक 
(4) गर्म पानी कुंड 
(5) रामनगर मंडला 
(6) कान्हा राष्ट्रीय उद्यान 
(7) बिरसिनी माता मंदिर पाली 
(8) बालाघाट जिले के पर्यटन स्थल   

डिंडोरी जिले के पर्यटन स्थलों के बारे में अधिक जानकारी youtube link पर भी प्राप्त कर  सकते हैं| जिसका   लिंक- https://youtu.be/XJ7ryneBlaQ

नोट-हमारी वेबसाइट में दी गई फोटो पर हमारा कॉपीराइट है | हमारी वेबसाइट www.dindori.co.in को क्रेडिट देते हुये (हमारी वेबसाइट को श्रेय देते हुए ) इन फोटो को उपयोग कर सकते हैं | 
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Saturday, January 18, 2020

शहडोल जिले के पर्यटन स्थल | Shahdol tourist place in hindi -

 January 18, 2020     जिले के समीपवर्ती पर्यटन स्थल   


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शहडोल जिले के  पर्यटन स्थल | Shahdol tourist place in hindi -

 शहडोल मध्यप्रदेश का एक सम्भाग और जिला मुख्यालय है | शहडोल जिले की स्थापना 1956 में मध्य प्रदेश के पुनर्गठन के सांथ ही की गई थी  | वर्तमान शहडोल जिले का क्षेत्रफल 6205 वर्ग किलोमीटर है और 2011 की जनगणना के अनुसार  शहडोल जिले की जनसंख्या 10,66,063 है | शहडोल जिले में 886 गाँव और 391 ग्राम पंचायत हैं | शहडोल मध्य प्रदेश के उमरिया, अनूपपुर, सीधी, सतना और छत्तीसगढ़ के कोरबा और बिलासपुर जिलों से घिरा हुआ है | शहडोल जिले की समुद्र तट से अधिकतम ऊंचाई 1123 मीटर है | इस जिले की मुख्य नदी सोन नदी और जोहिला है | शहडोल जिला में 6 तहसील -ब्यौहारी , जयसिंघनगर , सोहागपुर, गोहपारु , बुढार, जैतपुर हैं | शहडोल जिले को विभाजित कर 1998  में उमरिया और 2003 अनूपपुर  को जिला बनाया गया |
2008  में शहडोल को सम्भाग ( Division ) बनाया गया | 2008 में  शहडोल सम्भाग के अंतर्गत  जिला- डिंडोरी, जिला- उमरिया और जिला -अनुपपुर आते हैं |   शहडोल जिले में कई घूमने योग्य दर्शनीय और  पर्यटन स्थल हैं  |

शहडोल  के   दर्शनीय और पर्यटन स्थल | Shahdol tourist places in hindi-

शहडोल  जिले में घूमने  योग्य कई एतिहसिक ,धार्मिक और प्राकृतिक स्थान हैं जो पर्यटकों और सैलानियों और इतिहासकारों को अनायास ही अपनी और आकर्षित करते हैं | शहडोल के इन  दर्शनीय और पर्यटन स्थलों में  मुख्य हैं-

1-विराट मंदिर सोहागपुर शहडोल | Virat Mandir Sohagpur Shahdol - 

शहडोल जिले के दर्शनीय पर्यटन स्थलों में प्रमुख  है  सोहागपुर  का   विराट मंदिर  है | विराट मंदिर को विराटेश्वर  मंदिर भी कहा जाता है | विराट मंदिर का निर्माण 950 ईसवी से 1050 ईसवी के बीच कल्चुरी नरेश युवराज देव ने करवाया था | एक  जनश्रुति के अनुसार यह महाभारत काल के राजा विराट की नगरी है | महाभारत काल में पाण्डव यहाँ आये थे | मंदिर के पास ही  बाणगंगा में पातळतोड़ अर्जुन कुंड है | कहा जाता है की इस कुंड का निर्माण महाभारत काल में अर्जुन ने अपने तीर से किया था | अब यहाँ  एक कुंड और बाणगंगा मंदिर है | 

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Virateshwar Mandir Shahdol 

मंदिर के गर्भ गृह में शिवलिंग स्थापित है शिवलिंग के चारो ओर जलहरी बनी हुई है  | मंदिर के प्रवेश द्वार के पास ही नंदी और सिंह की प्रतिमा है | मन्दिर में भगवान् विष्णु , ब्रम्हाजी , वीणावादिनी और गणेश जी की प्रतिमा स्थापित है | मंदिर के बाहरी दीवारों पर कुछ  स्थानों पर  पुरुषों और महिलाओं की कामुक प्रतिमाएं है जो देखने में खजुराहो के मंदिर की तरह ही हैं | कहा जाता है की मंदिर के का सामने का हिस्सा गिर गया था जिसे 70 साल पहले रीवा के महाराजा गुलाब सिंह ने ठीक करवाया था | अभी भी मंदिर एक तरफ झुका हुआ दिखलाई देता है | वर्तमान में मन्दिर का रख रखाव पुरातत्व विभाग कर रहा है और मंदिर को संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है |विराट  मंदिर के  पास विवेकानंद गार्डन भी है | बाण गंगा में प्रतिवर्ष  मकर संक्रान्ति को विशाल मेला लगता है |

शहडोल के प्रमुख होटल बुक करने की सुविधा इन वेबसाइट पर उपलब्ध है -
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www.easemytrip.com

 2-बाणसागर डैम शहडोल | Bansagar Dam Shahdol -

 बाणसागर बांध  शहडोल जिले के सबसे प्रमुख दर्शनीय और पर्यटन  स्थलों  में से एक है | शहडोल जिले स्थित   बाणसागर  मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और  बिहार  की एक  बहुउद्देशीय  नदी घटी परियोजना है | बाणसागर परियोजना में सोन नदी पर विशाल बाँध बनाया गया है जो मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के देवलोंद स्थान पर निर्मित है |

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Bansagar Dam

 बाणसागर बांध की आधारशिला 1978 में पूर्व प्रधानमंत्री स्व.श्री मोरारजी देसाई ने राखी थी और  2006 को प्रधानमन्त्री  स्व. श्री  अटल बिहारी बाजपेयी ने इसे देश को समर्पित किया था | सोन नदी पर निर्मित बाँध की ऊंचाई 67 मीटर है | बाँध की  लंबाई 1020 मीटर है  जिसमें 671.71 मीटर पक्का बाँध है  | बाँध के डूब क्षेत्र में 336 गाँव आये थे जिनमे 79 गाँव पूरी तरह डूब क्षेत्र में आये और 257 गाँव आंशिक  रूप से डूबे थे | बाणसागर बाँध का मुख्य उदेश्य खेती हेतु पानी और बिजली का उत्पादन करना  है | बाणसागर से म.प्र. के 2490 वर्ग कि.मी. , उत्तर प्रदेश के 1500 वर्ग की.मी. और बिहार के 940 वर्ग की.मी. की सिंचाई होगी | और इससे 935 मेगावाट बिजली का उत्पादन भी होगा | बाण सागर शहडोल  से करीब 109 की.मी. और रीवा  से 55 की.मी. दूर है | यह शहडोल जिले का प्रमुख  पिकनिक स्पॉट  है | 

 3-माँ कंकाली देवी मंदिर शहडोल | Kankali mata mandir Shahdol -

शहडोल जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर अंतरा नामक गाँव में माँ कंकाली देवी का दरवार है जहाँ मातारानी सभी की मनोकामनाओं को पूरा  करती है | माँ कंकाली देवी मंदिर में साल भर भक्तों की भीड़ रहती है | मंदिर के गर्भ गृह में माँ कंकाली, माँ शारदा और माँ  सिंह वाहिनी बिराजमान हैं | कहा  जाता है कि  माँ  कंकाली की प्रतिमा 10-11 वीं सदी  के कल्चुरी कालीन है | 

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Kankali Mata Mandir Shahdol

माँ कंकाली की प्रतिमा 18 भुजाओं वाली है जिनका मुंह खुला हुआ , गले में मुंडमाला लटकी हैं , शरीर पर स्पष्ट पसलियाँ  होने के कारण माता का नाम कंकाली पड़ा | माता के पेरों के पास योगनियाँ  ,दोनों हांथों  में चंड -मुंड नामक  दैत्य और परम्परागत आयुध धारण किये हुए हैं | माता के दरवार में लाल कपडे में नारियल बाँधने से भक्तों की सभी मनोकामनायें पूर्ण होती हैं | माता के दरवार में कई मुख्यमंत्री हाजिरी लगाने आ चुके हैं | नवरात्री में भक्तों की अपार भीड़ रहती है और मंदिर में जवारे रखे जाते हैं और भण्डारों  का भी आयोजन होता है |

शहडोल रुकने के होटल किफायती होटल -  
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4-पंचमठा मंदिर सिंघपुर शहडोल  | Panchmatha mandir Shahdol -

शहडोल जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर  सिंहपुर नामक स्थान पर यह मंदिर स्थित है | लोग इसे पाण्डव  कालीन मंदिर मानते हैं |यहाँ 11 रूद्र शिवलिंग स्थापित थे और लोग 11 मार्ग से इनकी परिकृमा करते थे अब 9 मार्ग ही बचे शेष 2 मार्ग नष्ट  हो गए हैं | औरंगजेब के काल में मंदिर को बहुत नुकसान  पहुचाया गया | मंदिर के दरवाजे पर बहुत ही सुन्दर नक्कासी उकेरी गई है | लगभग 12 वर्ष पहले इस मंदिर पर पुरातव विभाग  ने ताला लगा दिया | मंदिर लगभग 11 वीं सदी का माना जाता है |

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पंचमठा  मंदिर परिसर में माँ काली का मंदिर है , आसपास के गाँव के लोग इन्हें कुल देवी मानते हैं शादी का न्योता सबसे पहले माता के दरबार में भेजा जाता है | माता के दरबार में हमेशा भक्तो की भीड़ रहती है  | यहाँ माता काली गणेश जी की योगनियों  के संग माता सरस्वती भी बिराजमान हैं | मंदिर परिसर में राम जानकी मंदिर, शिव मंदिर ,सती  चबूतरा भी स्थापित है | माना जाता है की पहले इस स्थान पर महिलायें सती  होती थीं |

  5-लखबरिया गुफा और मंदिर  - 

 लखबरिया गुफा शहडोल जिले के बुढ़हार तहसील के अंतर्गत  लखबरिया नामक स्थान पर बनाई गई हैं |  लखबरिया गुफा एक महत्त्वपूर्ण दर्शनीय  स्थानऔर पर्यटन स्थल है | जनश्रुति के अनुसार पाण्डवों  ने अपने अज्ञातवास का कुछ समय शहडोल जिले में बिताया और अरझुला  क्षेत्र में एक लाख गुफाओं का निर्माण किया  | एक लाख  गुफाओं के कारण इस गुफा का नाम लखबरिया बड़ा| अब यहाँ मात्र 13 गुफाएँ ही शेष बची हैं | कहा जाता है की हर गुफा में एक शिवलिंग है परन्तु अधिकांश गुफाओं के अन्दर का हिस्सा मिट्टी में दब गया है |

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Lakhbariya Cave Shahdol

6-क्षीर सागर शहडोल | Ksheer Sagar Shahdol  -

 क्षीर सागर भी शहडोल जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल और पिकनिक स्पॉट में से  एक है |  शहडोल जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर है | इस स्थान पर जोहिला नदी और मुढ़ना नदी का संगम है | जोहिला नदी पवित्र नर्मदा नदी और सोन नदी के बाद अमरकंटक से निकलने वाली तीसरी नदी है जबकि मुढ़ना नदी  शहडोल की एक छोटी नदी है  | चारो तरफ हरियाली से घिरा यह स्थान अनायास ही सैलानियों का मन मोह लेता है | इस स्थान पर संगम स्थल के पास  रेत का विशाल मैदान है जो समुद्र के बीच के सामान दिखलाई देता है |

7-मरखी माता मंदिर जमुनिहा केशवाही | Markhi Mata Mandir Shahdol -  

शहडोल जिले के केशवाही के पास जमुनिहा नामक स्थान पर मरखी माता का प्रसिद्ध मंदिर  है | मरखी माता को  धूमावती माता के नाम से भी जाना जाता  है | इन्हें देवी की 7 वीं विधा माना जाता है | मंदिर में माता की प्राचीन प्रतिमा है | मरखी माता धूमावती के दरवार में भक्तों की सभी मन्नत पूरी होती हैं इसीलिये यहाँ दूर दूर से भक्त आते हैं |  मरखी माता नवरात्री में यहाँ भक्तों की भीड़ देखने लायक होती है | पहले इस स्थान पर माता का बहुत ही छोटी से मढिया थी | 1988 में रामसंजीवन दुबे महाराज ने जिन्हें तनिया महाराज भी कहा जाता था इस स्थान पर मंदिर के अंदरूनी भाग का निर्माण करवाया था |

8- सरफा डैम शहडोल | Sarfa Dam Shahdol -

  सरफा डैम  शहडोल  जिला मुख्यालय से लगभग 15  किलोमीटर दूर है  | यह डैम सरफा नदी पर बना है | इस डैम के निर्माण का उद्देश्य  शहडोल  शहर को पानी की आपूर्ति करना है | डैम के पास बहुत ही सुन्दर गार्डन बनाया गया है | डैम के पास पंप हाउस है | पंप हाउस से कुछ ऊपर फ़िल्टर प्लांट है | डैम से पहले पानी पंप हाउस में जाता है , इसके पश्चात पानी को फ़िल्टर प्लांट भेजा जाता है | पानी के फिल्टर हो जाने के बाद यहाँ से शहडोल  शहर को भेजा  जाता है | डैम के पास का दृश्य बहुत ही मनमोहक है |सरफा डैम शहडोल जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल और पिकनिक स्पॉट में से  एक है | 

9- जिला पुरातत्व संग्रहालय शहडोल District Museum Shahdol -

 शहडोल के जिला पुरातत्व संग्रहालय  की स्थापना 1981 में की गई थी | यह शहडोल शहर के बीचो-बीच गाँधी स्टेडियम के पास कलेक्ट्रेट से कोतवाली मार्ग पर स्थित है | संग्रहालय में शहडोल, अनूपपुर और उमरिया और डिंडोरी  जिले की मूर्तियाँ और कलाकृतियों को सहेज कर रखा  गया है |  यहाँ की कलाकृतियों  में अधिकतर हिन्दू  और जैन धर्म से सम्बंधित हैं | संग्रहालय में तीन दीर्घाएं हैं | संग्रहालय में पूर्व पाषाण ,मध्य पाषाण और नव पाषाण काल में आदि मानव द्वारा उपयोग में लाये गए पत्थर के औजार भी रखे गए हैं | पुरातत्व संग्रहालय शहडोल में लगभग 318 पाषाण प्रतिमाऐं एवं वास्तु शिल्पखण्ड, 143 कलचुरि कालीन रजत मुद्राएं 86 रजत व 3 ताम्र, मुगल कालीन मुद्राऐं, 326 ब्रिटिश कालीन मुद्राएं 21 जीवाश्म है। पुरातत्व संग्रहालय शहडोल में भगवान् शिव , उमा-महेश, गणेश जी की नृत्यरत प्रतिमा, भगवान् विष्णु , नरसिंह देव, बारह अवतार , देवी की कई प्रतिमायें , महावीर स्वामी और तीर्थंकर जी की कई  प्रतिमाऐं रखी हुई हैं | इसके अतिरिक्त यहाँ 6 करोड़ वर्ष पुराने पेड़ पौधों और जीवों के जीवाश्म भी सहेजकर रखे गए हैं |
 
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10- माता सिंगवाहिनी भटिया वाली जैतपुर - 

शहडोल जिले के जैतपुर के पास  भटिया में सिंह वाहिनी माता का मंदिर है  जो शहडोल जिले का प्रमुख दर्शनीय स्थान है | मंदिर  पहले बहुत छोटा था अभी मंदिर का जीर्णोधार किया गया है | मंदिर में माता की प्राचीन प्रतिमा बिराजमान है | मंदिर परिसर में कुछ छोटे-छोटे मंदिर भी हैं | मंदिर में भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं | नवरात्र में भक्तो का भारी भीड़ होती है और मेला भी लगता है | मन्दिर में गणेश जी की प्राचीन प्रतिमा है |
                       इन स्थानों के अतिरिक्त शहडोल जिले में प्रसिद्ध धनपुरी का ज्वाला मुखी माता मंदिर , बुरहार  का राम जानकी मन्दिर , बुरहार का श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर , ब्योहारी के पास मऊ के चिपाढ नाथ हनुमान जी आदी प्रमुख धार्मिक घूमने योग्य धार्मिक थल हैं |
                       शहडोल जिले के सोहागपुर में मध्य  प्रदेश की सबसे बड़ी में कोयले की खदान हैं | शहडोल जिला और उमरिया जिला की सीमा के समीप शहडोल जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर जोहिला नदी पर स्थित जोहिला जल प्रपात और छोटी-तुम्मी बड़ी बड़ी-तुम्मी पर्यटकों के लिये आकर्षण के स्थान हैं |
शहडोल जिले के निकट विश्व प्रसिद्ध अमरकंटक और बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान ऐसे दर्शनीय पर्यटन स्थान हैं जहाँ पर्यटकों को जरुर जाना चाहिए |  शहडोल जिला से उमरिया और अनूपपुर जिला बनने के पहले अमरकंटक और बांधवगढ़ शहडोल जिले का हिस्सा थे |

शहडोल का इतिहास | Shahdol History  -  

शहडोल जिले का इतिहास  बहुत ही प्राचीन है | इस जिले का  इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है |  कहा जाता है की सोहागपुर और शहडोल का क्षेत्र महाभारत राजा विराट का राज्य क्षेत्र था | इसीलिये शहडोल को विराट नगरी भी कहा जाता है | पांडवों ने यहाँ अज्ञात वास का कुछ समय विताया  था |

  तेरहवीं शताब्दी के पहले यह इलाका कल्चुरी राजाओं के अधीन रहा | तेरहवीं शताब्दी  में रतनपुर के कल्चुरी राजा सोमदत्त ने अपनी पुत्री का विवाह बघेल राजा व्याघ्रदेव के पुत्र करण  देव के सांथ तय किया और विवाह के दौरान बांधवगढ़ का दुर्ग  और यह इलाका दहेज़ में दिया |

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Virateshwar Mandir Shahdol 
 
1808 के आसपास सोहागपुर और बांधवगढ़ का अधिकांश हिस्सा मराठाओं  के कब्जे में रहा और 1826 में अंग्रेजों के  पास चला गया | 1857 के विद्रोह के पश्चात सोहागपुर और अमरकंटक का इलाका रीवा  नरेश को दे  दिया गया | उसके बाद यह क्षेत्र 1947 तक  बघेल शासन के अधीन  रीवा राजाओं के पास रहा | 

कुछ शासकीय दस्तावेजों के अनुसार शहडोल का  नाम शहडोलवा  अहीर के नाम पर पड़ा | शहडोल जिले के सोहगपुर  में प्रभावशाली अहीर रहता था जिसका नाम शहडोलवा था उसने एक गाँव की नीव रखी थी उसी के  नाम पर यह स्थान शहडोल कहलाने लगा  | स्थानीय लोगों का कहना है कि इस स्थान पर  बहुत अधिक तालाब थे इसी कारण इसे सहस्त्र डोल कहा जाता था सहस्त्र डोल से शहडोल बना |

शहडोल में कहाँ रुके | Where to Stay in Shahdol -

शहडोल  में रुकने के लिए कई अच्छे होटल और लॉज  उपलब्ध हैं | इनमें कई होटल और लॉज में रुकने के लिए ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा उपलब्ध है जिनमे आप नीचे दी गई लिंक की सहायता से बुकिंग कर सकते हैं   |

शहडोल के प्रमुख होटल्स  | Hotels in Shahdol - 

(1) Hotel Maharaja Palalce
(2) Hotel Tridev
(3) Hotel Green Garden
(4) Hotel Shri Residency
(5) Hotel Royal Shadol
(6) Hotel Shivam Shahdol
(7) Hotel City Star
(8) Hotel Kundan King
(9) Parul Palace
(10) Hotel Aman Palace
(11) Welcome Inn
(12) Hotel Vijay Shree
(13) Hotel Reyansh 
(14) Zion Villa
(15) MM Hotel Shahdol
(16) Hotel Holidays Inn
(17) Hotel Option
(18) Hotel Yash Palace
(19) Hotel Planet 9
(20) Hotel Midtown

शहडोल के प्रमुख होटल बुक करने की सुविधा इन वेबसाइट पर उपलब्ध है -
www.makemytrip.com
www.goibibo.com
www.booking.com
www.easemytrip.com

शहडोल कैसे पहुंचें | How To Reach Shahdol -

वायु मार्ग -

शहडोल शहर के  सबसे नजदीक एयरपोर्ट जबलपुर का डुमना (एयरपोर्ट ) है जो शहडोल से लगभग 145 किलोमीटर है |

रेल मार्ग -

 शहडोल शहर का रेल्वे स्टेशन देश के अन्य शहरों से जुड़ा हुआ है |

सड़क मार्ग- 

शहडोल शहर सडक मार्ग से आस-पास के सभी बड़े-छोटे शहरों से भली भांति जुड़ा हुआ है | शहडोल से सड़क मार्ग से अन्य शहरों की दूरी -
(1) शहडोल से जबलपुर-175 किलोमीटर (SH -22 द्वारा ) ,(2) शहडोल से रीवा -168 किलोमीटर (SH -9  द्वारा ), (3) शहडोल से अमरकंटक  -105 किलोमीटर (SH -9 A  द्वारा ), (4 ) शहडोल से बांधवगढ़ -78  किलोमीटर (SH -10  द्वारा ), (5 ) शहडोल से उमरिया - 69 किलोमीटर (SH -43  द्वारा ), () शहडोल से अनुपपुर र- 45 किलोमीटर (SH -43  द्वारा ), (7 ) शहडोल से डिन्डोरी -94  किलोमीटर (SH -22 और SH -09 द्वारा ), (8) शहडोल से सीधी - 163  किलोमीटर (SH -9 और SH -55  द्वारा )
शहडोल जिले केपर्यटन स्थलों के बारे में अधिक जानकारी हमारे Youtube Video  पर भी प्राप्त कर सकते हैं -
लिंक-  https://youtu.be/fBZsbCqlQ7o


शहडोल के समीपवर्ती पर्यटन स्थल -
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Thursday, January 9, 2020

चमत्कारी गर्म पानी कुंड - मंडला | Garam Pani Kund - Mandla | Hot Water Well Mandla 2020

 January 09, 2020     जिले के समीपवर्ती पर्यटन स्थल   


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Garam Pani Kund Mandla

चमत्कारी गर्म पानी कुंड - मंडला | Garam Pani Kund Mandla -

मंडला और जबलपुर मार्ग पर मंडला शहर से करीब 18 किलोमीटर दूर ग्राम बबेहा के पास चमत्कारी गर्म पानी का कुंड है | जिसमें साल भर गर्म पानी रहता है | यह स्थान माँ नर्मदा के समीप और बरगी डैम के बैक वाटर क्षेत्र में आता है | यह  स्थान चारो तरफ पानी से घिरा एक छोटा सा मानव निर्मित टापू है और इस टापू पर गर्म पानी का कुंड है जिसमें हर मौसम में पानी गर्म रहता है कहा जाता है की इस कुंड में स्नान करने से सभी प्रकार के चर्म रोग ठीक हो जाते हैं | 

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वर्तमान में गर्म पानी कुंड की स्थिति - 

वर्तमान में गर्म पानी कुंड की उंचाई बहुत अधिक है | कुंये की  ऊपरी सतह से लगभग 5.5 फीट नीचे की तरफ लोहे की रॉड लगी लगाई गई  है | कुंड की गहराई  बहुत अधिक है इसीलिये यहाँ स्नान करते समय  सावधानी रखनी चाहिये | कुंड से बहने वाला पानी पीछे की तरफ चला जाता है | कुंड के और टापू के चारो ओर लोहे की रेलिंग लगे गई है | चूँकि कुंड पवित्र नर्मदा नदी के पास है इसीलिये यहाँ  समय समय पर मेला भी लगते रहते है | लोगों का कहना  है की इस कुंड में नहाने से चर्म रोग ठीक होते हैं | गर्म पानी कुंड में कुंड का पानी हमेशा गर्म और इसके चारो ओर बैक वाटर का पानी ठंडा रहता है और इन दोनों जगहों  के पानी का स्वाद  भी अलग है |

गर्म पानी कुंड मंडला का इतिहास –

 बरगी डैम के निर्माण से पहले यह स्थान जैसा आज दिखलाई देता है पहले वैसा नहीं था | पहले इस स्थान के चारो तरफ ना तो पानी था न ही कुंड की ऊंचाई इतनी अधिक थी | पहले यहाँ एक छोटा सा गर्म पानी का कुंड था  जिसमें साल भर गर्म पानी निकलता रहता था | नर्मदा नदी पर बरगी डेम निर्माण  के बाद यह गर्म पानी कुंड बरगी डैम के बैक वाटर में डूब गया था जो सिर्फ गर्मी में जब डैम का जलभराव कम हो जाता था तभी दिखलाई देता था | इसके पश्चात शासन और ग्रामीणों के प्रयास से इस कुंड के चारो तरफ मिट्टी का भराव कर गरमपानी कुंड के ऊपर कुंयेनुमा आकृति देकर बैक वाटर के जलस्तर के ऊपर लाया गया और इस कुंड को नवजीवन दिया गया | यह स्थान चारो तरफ़ा घने पेड़-पौधों और पानी से घिरा है |कुछ लोगों का मानना है कि इस स्थान पर भगवान् परसुराम ने तपस्या की थी | कुंड के पास एक छोटा सा मंदिर भी है | इस मंदिर में प्राचीन मूर्तियाँ भी हैं |
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गर्म पानी कुंड के बारे में वैज्ञानिक तर्क –

 वैज्ञानिकों का तर्क  है की  इस  स्थान  के नीचे सल्फर की चट्टानें हो सकती हैं और सल्फर की चट्टानों के कारण ही इस कुंड का पानी गर्म रहता है | और इसी सुल्फर युक्त पानी के कारण ही चर्म रोग ठीक होते हैं |
अगर आप एक ही समय गर्म और ठंडे पानी का आनंद लेना चाहते हैं तो इस स्थान अवश्य आयें |

गर्म पानी कुंड मंडला कैसे पहुंचे -

मंडला जिले में स्थित गर्म पानी कुंड मंडला जिला मुख्यालय से करीब 18 किलोमीटर दूर बबेहा गाँव के पास  मंडला-जबलपुर राष्ट्रीय मार्ग  से 2 किलोमीटर अन्दर है | गर्म पानी कुंड मंडला और जबलपुर दोनों ही स्थानों से जा सकते हैं | नागपुर, बालाघाट, सिवनी ,रायपुर और बिलासपुर से आने वाले मंडला होकर बबेहा होते हुए गर्म पानी कुंड जा सकते हैं | 
इंदौर, उज्जैन, भोपाल, मुबई, दिल्ली से आने पर जबलपुर होकर ही आना पड़ता है | जबलपुर से बबेहा 70 किलोमीटर पड़ता है |  निकटतम रेल्वे स्टेशन मंडला है  मंडला तक बहुत ही कम रेलगाड़ी चलती हैं|  निकटतम बड़ा रेल्वे स्टेशन जबलपुर ही है| निकटतम हवाई अड्डा भी जबपुर ही है |

गर्म पानी में रुकने कि व्यवस्था -

गर्म पानी कुंड के पास रुकने कि कोई व्यवस्था नहीं है | रुकने के लिए नजदीकी  होटल मंडला में ही मिलेंगे| सुविधानुसार जबलपुर में  भी रुका जा सकता है | 



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गर्म पानी कुंड के बारे में अधिक जानकारी youtube विडियो पर भी देख सकते हैं -
लिंक-    https://youtu.be/ddPVyXo85ek
 
नोट-वेबसाइट में दी गई फोटोज पर हमारा copyright है | www.dindori.co.in को क्रेडिट देते हुए इन फोटो का इस्तेमाल किया जा सकता है |
 
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